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बरेली। कैंट थाना क्षेत्र के ग्राम वभिया निवासी जानकी पुत्र दीपचन्द ने जीवित रहते स्वयं को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराने, कूटरचित विरासत के आधार पर कृषि भूमि अपने नाम दर्ज कराने, बैंक से ऋण लेने, जमीन के फर्जी बैनामे कराने और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले में रामवती, उसके पति महेन्द्र पाल, तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल, तत्कालीन चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम वभिया में उसकी कृषि भूमि गाटा संख्या 1083द, 1094ख, 1102क और 1103घ में स्थित है। आरोप है कि वह कुछ समय के लिए तीर्थ यात्रा पर गया था। इसी दौरान उसकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर रामवती ने तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल के साथ मिलकर उसे मृत दर्शाने वाला फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर रामवती ने स्वयं को शिकायतकर्ता की सगी पुत्री और वारिस दर्शाते हुए वर्ष 2004 में राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करा लिया। बाद में शिकायतकर्ता की पैरवी पर 15 जनवरी 2013 को बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी के आदेश से कथित फर्जी नामांतरण निरस्त कर उसका नाम पुनः खतौनी में बहाल किया गया।
जमीन बंधक रखकर लिया ऋण
शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी तरीके से नाम दर्ज होने के दौरान रामवती ने 20 अक्टूबर 2011 को उप सहकारी ग्राम विकास बैंक से मुर्गी पालन के नाम पर 60 हजार रुपये का ऋण लिया और उसकी कृषि भूमि को बैंक में बंधक रख दिया। शिकायत के मुताबिक ऋण की राशि ब्याज सहित बढ़कर करीब 3.30 लाख रुपये हो गई है और भूमि अभी भी बैंक में बंधक है।
करोड़ों की जमीन के बैनामे कराने का आरोप
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि 14 मई 2012 को रामवती ने शिकायतकर्ता की भूमि के कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर ओम प्रकाश, अजय पाल और विजेन्द्र के पक्ष में करीब 20.88 लाख रुपये में बैनामे कर दिए। दस्तावेज लेखक राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू तथा गवाह नितिन पर भी कथित रूप से सहयोग करने का आरोप लगाया गया है।शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में खरीदारों में से एक ने कथित हिस्से को दूसरे व्यक्ति के पक्ष में बेच दिया। आरोप है कि इसके बाद जमीन पर अवैध कब्जा कर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया गया और अवैध खनन भी किया गया।
समझौते के बाद भी विवाद बरकरार
जानकी के मुताबिक उसने मामले का समाधान कराने के लिए रामवती और उसके परिवार से संपर्क किया। आरोप है कि 19 अगस्त 2025 को 100 रुपये के ई-स्टाम्प पर एक समझौतानामा तैयार किया गया, जिसमें रामवती ने कथित तौर पर फर्जी विरासत के आधार पर नाम दर्ज कराने की बात स्वीकार की और बैंक ऋण चुकाने तथा जमीन को ऋणमुक्त कराने का आश्वासन दिया।शिकायत के अनुसार इसके एवज में 3.50 लाख रुपये का एक चेक दिया गया, जो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद भी न बैंक ऋण चुकाया गया, न जमीन को बंधनमुक्त कराया गया और न कथित फर्जी बैनामों को निरस्त कराया गया।
जान से मारने की धमकी का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपनी जमीन वापस लेने और कब्जा छोड़ने की मांग की तो रामवती, उसके पति महेन्द्र पाल और रामपाल ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले की गंभीरता को देखते हुए रामवती, महेन्द्र पाल, तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल, चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह, ओम प्रकाश, अजय पाल, विजेन्द्र, रामभजन, गवाह नितिन तथा दस्तावेज लेखक राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बैंक ऋण धोखाधड़ी, चेक के जरिए कथित धोखाधड़ी, अवैध खनन और धमकी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के साथ चकबंदी अभिलेख, कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, वर्ष 2013 का चकबंदी अधिकारी का आदेश, खतौनी, समझौतानामा, चेक का विवरण, कथित बैनामों की प्रतियां और बैंक ऋण संबंधी दस्तावेज संलग्न किए जाने का उल्लेख है। प्रार्थना पत्र 12 जून 2026 का है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।