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टाइमलाइन न्यूज़ (हिन्दी) के लिए बरेली से चरन सिंह की रिपोर्ट
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के चयन वेतनमान की प्रक्रिया को लेकर विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद शिक्षकों को चयन वेतनमान के लिए महीनों तक फाइलें जमा करने और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आरोप है कि कई ब्लॉकों में निर्धारित समय पूरा होने के कई महीने बाद भी चयन वेतनमान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
शुक्रवार को गांधी उद्यान में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ बरेली की विशेष बैठक जिला अध्यक्ष जितेंद्र गंगवार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में ब्लॉक पदाधिकारियों ने चयन वेतनमान की प्रक्रिया में हो रही देरी और शिक्षकों को हो रही परेशानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। जिला अध्यक्ष जितेंद्र गंगवार के अनुसार, शेरगढ़ ब्लॉक में जनवरी 2026 में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों का चयन वेतनमान अभी तक वेतन में नहीं लगाया गया है। वहीं क्यारा, नवाबगंज, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा और भुता ब्लॉकों में 20 मई 2026 तथा 2 जुलाई 2026 को 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों की सूची अभी तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नहीं भेजे जाने की बात कही गई है।
ऑनलाइन प्रक्रिया फिर फाइलों का बोझ क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिक्षकों की सेवा संबंधी जानकारी ऑनलाइन सर्विस बुक में उपलब्ध है और चयन वेतनमान की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा रही है, तो फिर शिक्षकों से बार-बार फाइलें जमा कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है? शिक्षकों का आरोप है कि फाइल जमा करने के बाद भी प्रक्रिया कई-कई महीने तक आगे नहीं बढ़ती। ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है। यदि विभाग के पास शिक्षक की नियुक्ति, सेवा अवधि और अन्य आवश्यक विवरण ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तो विभागीय स्तर पर सत्यापन और कार्रवाई में इतनी लंबी देरी क्यों?
10 साल की सेवा के बाद भी अधिकार के लिए इंतजार
चयन वेतनमान किसी शिक्षक पर विभाग की कृपा नहीं, बल्कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद नियमों के तहत मिलने वाला लाभ है। ऐसे में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी शिक्षकों को महीनों तक अपने हक के लिए इंतजार करना पड़े तो यह विभागीय व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जाएगी। एक तरफ सरकार विभागीय कामकाज को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि शिक्षकों को एक छोटे से वेतन संबंधी लाभ के लिए महीनों तक ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो डिजिटल व्यवस्था का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
अधिकारी समयबद्ध प्रक्रिया क्यों नहीं सुनिश्चित कर पा रहे?
शिक्षक संगठन का आरोप है कि कुछ ब्लॉकों में चयन वेतनमान की प्रक्रिया समय से पूरी करने में अधिकारियों की रुचि नहीं दिखाई दे रही है। यदि ऐसा है तो सवाल यह भी है कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
👉 क्या चयन वेतनमान के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है?
👉 क्या लंबित मामलों की ब्लॉकवार समीक्षा की जाती है?
👉 यदि समीक्षा होती है तो महीनों से लंबित मामलों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
👉 यदि प्रक्रिया ऑनलाइन है तो शिक्षकों को बार-बार व्यक्तिगत रूप से फाइल लेकर कार्यालय पहुंचने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
समान नियुक्ति, फिर लाभ मिलने में इतना अंतर क्यों?
शिक्षकों का यह भी कहना है कि अन्य जनपदों में उनके साथ भर्ती हुए शिक्षकों के चयन वेतनमान के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, जबकि बरेली के कई ब्लॉकों में प्रक्रिया अभी तक लंबित है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में एकरूपता और निगरानी पर भी सवाल खड़े होते हैं। शिक्षकों का कहना है कि एक ही भर्ती और लगभग समान सेवा अवधि वाले शिक्षकों को अलग-अलग जनपदों में अलग-अलग समय पर लाभ मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रक्रिया को समयबद्ध और समान रूप से लागू करने की जरूरत है।
शिक्षक संगठन ने खोला मोर्चा
मांडलिक मंत्री रुचि सैनी ने कहा कि जब चयन वेतनमान की प्रक्रिया ऑनलाइन है और शिक्षकों की पूरी जानकारी ऑनलाइन सर्विस बुक पर उपलब्ध है, तो फाइल जमा कराने के नाम पर शिक्षकों को परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन जल्द ही उच्च अधिकारियों से शिकायत कर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों को उठाएगा और शिक्षकों का चयन वेतनमान जल्द लगवाने के लिए प्रयास करेगा। बैठक में जिला मंत्री गिरजेश, जिला कोषाध्यक्ष पुष्कर उपाध्याय, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद गंगवार, संयुक्त मंत्री अरविंद चौधरी, संगठन मंत्री मोनिका गुप्ता, जिला प्रवक्ता अरविंद कुमार, बिथरी ब्लॉक मंत्री अजय कुमार, कोषाध्यक्ष प्रदीप पुष्कर, सुभाष बाबू, भीम सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस मामले में केवल आश्वासन देता है या वास्तव में लंबित चयन वेतनमान के मामलों की ब्लॉकवार समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षकों को समयबद्ध तरीके से उनका हक दिलाता है।