Friday, 25-09-2026
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सुदामा की निस्वार्थ मित्रता ने छुआ मन, कृष्ण ने निभाई बालसखा की यारी

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टाइमलाइन न्यूज़ हिंदी के लिए चरन सिंह की रिपोर्ट

बरेली। दूरदर्शन केंद्र के पास स्थित शांतिकुंज पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज में चल रही रासलीला के तीसरे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता और सच्चे प्रेम पर आधारित भावपूर्ण लीला का मंचन किया गया। वृंदावन धाम से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण और सुदामा की बाल्यकाल की मित्रता से लेकर द्वारिका में उनके पुनर्मिलन तथा सुदामा के जीवन में आए बदलाव तक की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।


लीला का शुभारंभ उज्जैन स्थित महर्षि संदीपनी के आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की बालसखा के प्रसंग से हुआ। समय बीतने के बाद श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बनकर द्वारिकाधीश कहलाए, जबकि सुदामा अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत करते रहे। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे। फटे कपड़ों और नंगे पैर पहुंचे सुदामा को द्वारपालों ने रोक लिया। जब द्वारिकाधीश को उनके बचपन के मित्र सुदामा के आने की सूचना मिली तो वे नंगे पैर ही उनसे मिलने दौड़ पड़े।


श्रीकृष्ण ने सुदामा को गले लगाकर उनका स्वागत किया और उन्हें राजसिंहासन पर बैठाया। उन्होंने स्वयं सुदामा के पैर धोए, जबकि रुक्मणी ने उन्हें पंखा झुलाया। सुदामा संकोचवश श्रीकृष्ण से अपनी गरीबी के बारे में कुछ भी नहीं कह सके और बिना कुछ मांगे ही वापस लौट गए। घर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि उनकी पुरानी झोपड़ी के स्थान पर भव्य महल खड़ा है और परिवार खुशहाल जीवन जी रहा है। तब सुदामा समझ गए कि उनके बालसखा ने बिना कहे ही उनकी पीड़ा दूर कर दी।लीला के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। संदेश को इन पंक्तियों में अभिव्यक्त किया गया—“किस तरह यारी निभाते-निभाते कान्हा, खुद को सुदामा का कर्जदार बना गए।”

आशुतोष दास जी महाराज ने कहा कि सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र के मन की पीड़ा और उसके अभाव को बिना कहे समझ सके। सच्ची मित्रता धन, पद और सामाजिक स्थिति से परे होती है तथा निस्वार्थ प्रेम, समानता और समर्पण पर आधारित होती है।

विद्यालय प्रबंधक सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि रासलीला के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक एवं आध्यात्मिक गुणों का विकास करने के साथ उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं विद्यार्थियों को निस्वार्थ प्रेम, समानता, भक्ति, विनम्रता और क्षमाशीलता की प्रेरणा देती हैं तथा सच्ची मित्रता के प्रति समर्पण का भाव सिखाती हैं।


प्रधानाचार्य राधिका चंद ने श्रीवृंदावन धाम से पधारे कलाकारों का आभार व्यक्त किया। आयोजन में आशुतोष शर्मा, महेश हरियाणा, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र पटेल, रेनू यादव, जानकी विष्ट, बबिता, प्राची त्यागी, पुष्पांजलि, प्रियंका यादव, शिवांगी सक्सेना, देवदत्त गंगवार, साक्षी गोस्वामी, दीक्षा साख्यधर, रंजीत गोस्वामी, आरती चौहान, इशिका, अवधेश सिंह, श्रेया सिंह, केतकी शर्मा, लता वर्मा, स्वाति सिंह, अजय कुमार, सौम्य शर्मा, बसंत विष्ट, रूपेश कुमार आदि का विशेष योगदान रहा।

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