Monday, 24-08-2026
नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेसा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91-9411848427, 9458606264, 8630488283, 9927444485 , हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें | अन्य शहरों की ख़बरें देने के लिए एवं रिपोर्टर बनने के लिए संपर्क कर सकते है मोबाइल नंबर : +91-9411848427

वो चिट्ठियों का जमाना

whatsapp    

वो भी  चिट्ठियों का क्या जमाना था,

कागज के टुकड़ों से प्रेम बताना था।


डाकिया घर की कुंडी खड़काता था,

प्यारे हाथों से खत को पकड़ाता था,

बंद चिट्ठी में ख़बरों का खजाना था।

वो भी चिट्ठियों का क्या जमाना था।


साईकल की घंटी जैसे ही सुनाई दे,

खुशखबरी की कोई आन बधाई दे,

नीले रंग के  टुकड़ों का दीवाना था।

वो भी चिट्ठियों का क्या ज़माना था।


चिट्ठी का कोना फटा सा दिख जाए,

देखते  ही आँखों  से आँसू आ जाएं,

अनहोनी का संकेत वो दिखाना था।

वो भी चिट्ठियों का क्या जमाना था।


प्रेमपत्र को प्रेयसी  सीने लगाती थी,

ख्वाबों  की दुनिया में खो जाती थी,

प्रेम अनुभूति भरा खरा निशाना था।

वो भी चिट्ठियों का क्या ज़माना था।


चिट्ठी से मनसीरत चित खिल जाए,

रोये तो कभी मंद मंद वो  मुस्कराए,

खुशी गमों से भरा ठोर ठिकाना था।

वो भी चिट्ठियों का क्या जमाना था।


वो भी चिट्ठियों का क्या जमाना था,

कागज के टुकड़ों से प्रेम बताना था।


सुखविंद्र सिंह मनसीरत 

खेड़ी राओ वाली (कैथल)

whatsapp whatsapp